मध्यप्रदेश राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को भविष्य का मुख्य परिवहन साधन बनाने के उद्देश्य से "मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025" को मंजूरी दे दी है। यह नीति राज्य के परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी उत्पन्न करेगा।
प्रमुख उद्देश्य
मध्यप्रदेश की इस नई नीति के तहत, इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी। इन प्रोत्साहनों में 2 पहिया, 3 पहिया, इलेक्ट्रिक कार और बसों के लिए विशेष सब्सिडी दी जाएगी, साथ ही चार्जिंग स्टेशन के लिए भी वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। नीति के अंतर्गत राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन अधोसंरचना और संबंधित विनिर्माण उद्योगों के लिए एक आकर्षक माहौल तैयार किया जाएगा।
प्रमुख लक्ष्य
इस नीति का उद्देश्य मध्यप्रदेश को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसके तहत:
- भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों को मॉडल इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) शहरों के रूप में विकसित किया जाएगा।
- पॉलिसी की अवधि के अंत तक राज्य के 80 प्रतिशत सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक में परिवर्तित करने का लक्ष्य रखा गया है।
- इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क का विकास किया जाएगा, जिससे सड़क पर हर 20 किलोमीटर पर एक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध होगा।
- प्रमुख मार्गों और राजमार्गों पर लंबी दूरी के लिए फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
विशेष प्रोत्साहन और घोषणाएं
इस नीति के अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों और चार्जिंग स्टेशनों को कई वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे, जिनमें:
- वाहन कर और पंजीकरण शुल्क में छूट।
- रेट्रोफिटिंग के लिए प्रोत्साहन।
- छोटे, मध्यम और बड़े चार्जिंग स्टेशनों के बुनियादी ढांचे के लिए सहायता।
- बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों के लिए सेवा प्रदाताओं को प्रोत्साहन।
इसके अलावा, सभी पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों को भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत ग्रीन नंबर प्लेट जारी की जाएगी। व्यक्तिगत उपयोग के लिए सफेद अक्षरों वाली हरी नंबर प्लेट और व्यावसायिक उपयोग के लिए पीले अक्षरों वाली हरी नंबर प्लेट जारी की जाएगी।
चार्जिंग अधोसंरचना का विकास
राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ चार्जिंग अधोसंरचना का विकास भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस नीति के तहत:
- राज्य के प्रमुख राजमार्गों पर प्रत्येक 20 किलोमीटर पर कम से कम एक चार्जिंग स्टेशन बनाया जाएगा।
- हर 100 किलोमीटर पर भारी-भरकम इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया जाएगा।
- पॉलिसी अवधि के अंत तक सभी पेट्रोल पंपों पर कम से कम एक इलेक्ट्रिक चार्जिंग प्वाइंट उपलब्ध होगा।
कौशल विकास और रोजगार सृजन
नीति में कौशल विकास और रोजगार सृजन के लिए भी विशेष योजनाएं बनाई गई हैं। इसमें:
- उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए 2 करोड़ रुपये तक का अनुदान।
- इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्ट-अप के लिए इन्क्यूबेशन केंद्रों की संख्या बढ़ाना।
- इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में नई संभावनाओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों की शुरुआत।
मध्यप्रदेश ईवी प्रमोशन बोर्ड का गठन
इस नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए मध्यप्रदेश ईवी प्रमोशन बोर्ड का गठन किया जाएगा। यह बोर्ड सभी इलेक्ट्रिक वाहन संबंधित निर्णयों, दिशा-निर्देशों और समन्वय का कार्य करेगा।
मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025 राज्य में एक पर्यावरणीय और आर्थिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल राज्य में प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। इस नीति के सफल क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त हो सकता है।